हरियश राय
समकालीन हिंदी कथाकार — ‘मधुशाला’ के कवि हरिवंश राय बच्चन से भिन्न व्यक्ति
हरियश राय समकालीन हिंदी कथा-साहित्य के लेखक हैं। लगभग तीन दशकों से वे निरंतर कथा-लेखन में सक्रिय हैं — उपन्यास, कहानी-संग्रह, यात्रा-वृत्तांत तथा आलोचना और संपादन की पुस्तकें उनके नाम हैं।
यहाँ एक बात स्पष्ट कर देना आवश्यक है। हरियश राय का नाम प्रायः कवि हरिवंश राय बच्चन (1907–2003) के साथ भ्रमित कर दिया जाता है — खोज-इंजन भी अकसर यह भूल करते हैं। दोनों भिन्न व्यक्ति हैं। हरिवंश राय बच्चन 'मधुशाला' के रचयिता कवि थे; हरियश राय समकालीन कथाकार हैं, जिनका काम उपन्यास, कहानी और आलोचना में है।
जीवन
उनकी प्रारम्भिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के फ़तेहगढ़ में हुई। 1971 के बाद की शिक्षा दिल्ली से पूरी हुई। लेखन के शुरुआती दौर में उनका नाता व्यंग्य से रहा।
लगभग बत्तीस वर्ष तक बैंक में कार्य करने के उपरांत वे उप महाप्रबंधक के पद से सेवामुक्त हुए। अब उनका निवास दिल्ली में है।
'उद्भावना' पत्रिका के भीष्म साहनी अंक का संपादन उन्होंने किया।
लेखन
उनका लेखन सामाजिक यथार्थ की परंपरा में आता है। बीते चार दशकों में भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में जो बदलाव आए हैं, उनकी कहानियाँ उन्हें गहरी मानवीय चिंता के साथ दर्ज करती हैं।
उनके उपन्यास कुछ बड़े प्रश्नों से लगातार टकराते रहे हैं। दहन धार्मिक कट्टरता, सांप्रदायिकता और सामंती सोच के प्रश्न उठाता है। दूब हिमाचल के पहाड़ों में भूमि अधिग्रहण, कटते जंगलों और सूखते जलस्रोतों की पृष्ठभूमि में एक स्त्री के आत्मसम्मान की लड़ाई कहता है — विकास और पर्यावरण के बीच के तनाव को छोड़े बिना।
कथा-लेखन के साथ-साथ उन्होंने आलोचना और विमर्श की पुस्तकें भी लिखी हैं — भारत-विभाजन और हिंदी उपन्यास, शिक्षा और औपनिवेशिक दासता, तथा सूचना तकनीक और बाज़ार जैसे विषयों पर।
उनकी भाषा में सादगी और सीधापन है। शिल्प का आडंबर उनके यहाँ नहीं मिलता।
अनुवाद
उनकी कहानियाँ उर्दू, तेलुगु, ओड़िया, गुजराती, पंजाबी और मैथिली में अनूदित हो चुकी हैं।
संपर्क
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जानकारी सत्यापनाधीन — यह सामग्री सार्वजनिक स्रोतों से संकलित है और लेखक द्वारा पुष्टि की प्रतीक्षा में है।